माँ काली की आरती

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॥ Aarti ॥

जय काली माता, मैया जय काली माता।

संतन की तू रक्षा, करती है तू भक्‍तों की॥

॥ जय काली माता..॥

मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा।

हाथ जोड़ तेरे, द्वार खड़े॥

॥ जय काली माता..॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरें।

सुन जगदंबे कर ना विलंबे, संतन के भंडार भरें॥

॥ जय काली माता..॥

बुद्धि विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करे।

चरण कमल का लिया आसरा, चरण तुम्हारे आन पड़े॥

॥ जय काली माता..॥

जब-जब पीर पड़े भक्तों पर, तब-तब आए सहाय करें।

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥

॥ जय काली माता..॥

॥ Aarti ॥

Jai Kali Mata, Maiya Jai Kali Mata.

Santan Ki Tu Raksha, Karti Hai Tu Bhakton Ki.

|| Jai Kali Mata..||

Mangal Ki Sewa, Sun Meri Deva.

Haath Jod Tere, Dwar Khade.

|| Jai Kali Mata..||

Paan Supari Dhwaja Nariyal, Le Jwala Teri Bhent Dhare.

Sun Jagdambe Kar Na Vilambe, Santan Ke Bhandar Bhare.

|| Jai Kali Mata..||

Buddhi Vidhata Tu Jagmata, Mera Karaj Sidh Kare.

Charan Kamal Ka Liya Aasra, Charan Tumhare Aan Pade.

|| Jai Kali Mata..||

Jab-Jab Peer Pade Bhakton Par, Tab-Tab Aaye Sahay Kare.

Santan Pratipali Sada Khushali, Jai Kali Kalyan Kare.

|| Jai Kali Mata..||

संक्षेप

"जय काली माता" शक्ति की उग्र और रक्षक स्वरूपा देवी काली की स्तुति में गाई जाने वाली आरती है।

यह आरती काली पूजा, नवरात्रि और काली मंदिरों में विशेष रूप से गाई जाती है।

आरती में देवी को भक्तों के संकट में सदैव सहायता के लिए आने वाली और कल्याणकारी बताया गया है।

जानकारी

काली आरती के बारे में

"जय काली माता" शक्ति की उग्र स्वरूपा और भक्तों की रक्षक देवी काली की स्तुति में गाई जाने वाली आरती है। यह देवी को संतों की रक्षक और भक्तों के दुखों को दूर करने वाली माता के रूप में वर्णित करती है, तथा काली मंदिरों में श्रद्धा से गाई जाती है।

आरती में क्या वर्णन है?

आरती में देवी काली को "जगदंबे" कहकर संबोधित किया गया है, जो भक्तों के भंडार भरने वाली और उनकी बुद्धि की विधाता हैं। इसमें पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल के भोग का उल्लेख है, और कहा गया है कि जब-जब भक्तों पर संकट आता है, तब-तब देवी सहायता के लिए आती हैं।

काली आरती के लाभ

• इस आरती को गाने से भय और संकटों से रक्षा होने की मान्यता है। • यह साहस और आत्मशक्ति की प्राप्ति के लिए गाई जाती है। • देवी की कृपा से कार्यों में सिद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। • आरती के अनुसार यह भक्तों का सदा कल्याण करने वाली है।

आरती करने का सही समय

1. काली पूजा (दीपावली की रात) पर इसे विशेष श्रद्धा से गाया जाता है। 2. नवरात्रि के दौरान काली मंदिरों में प्रतिदिन इसका पाठ होता है। 3. मंगलवार और शुक्रवार को भी इसे गाना शुभ माना जाता है।

आरती कैसे करें

देवी काली की मूर्ति के समक्ष दीपक जलाकर, पान-सुपारी और नारियल अर्पित कर यह आरती गाई जाती है। भक्त हाथ जोड़कर श्रद्धा से खड़े होते हैं और अंत में आरती की थाली घुमाकर प्रसाद वितरित किया जाता है।

Frequently Asked Questions

जय काली माता किसकी आरती है?

यह शक्ति की उग्र और रक्षक स्वरूपा देवी काली की स्तुति में गाई जाने वाली आरती है।

यह आरती कब गानी चाहिए?

इसे काली पूजा, नवरात्रि के दौरान और मंगलवार-शुक्रवार को विशेष रूप से गाया जाता है।

आरती में देवी को किन भोगों का उल्लेख है?

आरती में पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल के भोग का उल्लेख है, जो पारंपरिक रूप से देवी काली को अर्पित किए जाते हैं।

काली आरती गाने से क्या लाभ होता है?

मान्यता है कि इससे भय और संकटों से रक्षा होती है तथा साहस और आत्मशक्ति की प्राप्ति होती है।

आरती में "जब-जब पीर पड़े" पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति में कहा गया है कि जब भी भक्तों पर संकट आता है, देवी काली सदैव उनकी सहायता के लिए आती हैं।

काली पूजा और इस आरती का क्या संबंध है?

काली पूजा दीपावली की रात मनाई जाती है, और इस अवसर पर काली मंदिरों में यह आरती विशेष भव्यता के साथ गाई जाती है।

क्या यह आरती केवल बंगाल में प्रचलित है?

काली पूजा बंगाल में विशेष रूप से प्रमुख है, परन्तु यह आरती देशभर के काली मंदिरों और शक्ति उपासकों द्वारा गाई जाती है।