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लक्ष्मी
पिता: अनादि, माता: अनादि
वैकुण्ठ • क्षीरसागर
Dec/Jan • भारत
Aug/Sep • भारत
त्रिदेवों में ब्रह्मा सृष्टि-कर्ता, शिव संहारक और विष्णु पालनकर्ता माने जाते हैं। पालनकर्ता का अर्थ है—जीवों की रक्षा करना, संसार में संतुलन और धर्म की स्थापना करना। जब-जब अधर्म बढ़ता है, विष्णु अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं।
विष्णु के दशावतार हैं: मत्स्य, कूर्म, वाराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। प्रत्येक अवतार एक विशेष उद्देश्य से प्रकट हुआ—जैसे नरसिंह ने प्रह्लाद की रक्षा की, राम ने रावण का वध किया, और कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।
वैकुण्ठ एकादशी मार्गशीर्ष या पौष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन उपवास और विष्णु पूजा करने से मोक्ष का मार्ग खुलता है। दक्षिण भारत में श्रीरंगम मंदिर में 'स्वर्ग द्वार' खोला जाता है, और लाखों भक्त दर्शन करते हैं।
विष्णु का वाहन गरुड़ है, जो शक्ति, साहस और तेजी का प्रतीक है। गरुड़ पर आरूढ़ विष्णु संसार में धर्म की रक्षा करने के लिए तत्पर रहते हैं।
विष्णु चार भुजाओं में सुदर्शन चक्र, पांचजन्य शंख, कौमोदकी गदा और कमल धारण करते हैं। ये क्रमशः समय, ध्वनि/सृष्टि, शक्ति और शांति का प्रतीक हैं।
प्रमुख विष्णु तीर्थ स्थलों में बद्रीनाथ धाम (उत्तराखंड), पुरी का जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा), श्रीरंगम रंगनाथस्वामी मंदिर (तमिलनाडु), तिरुपति बालाजी (आंध्रप्रदेश) और द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात) शामिल हैं।
एकादशी उपवास विष्णु भक्ति का सबसे प्रमुख अंग है। हर माह की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी पर भक्त उपवास रखते हैं। इसके अलावा जन्माष्टमी, रामनवमी और वैकुण्ठ एकादशी विशेष रूप से विष्णु भक्ति से जुड़ी हैं।
विष्णु केवल भौतिक जगत के पालनकर्ता नहीं बल्कि आत्मा के मार्गदर्शक भी हैं। वे धर्म, करुणा और सत्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी शरण में जाने से जीवन का संतुलन, मानसिक शांति और अंततः मोक्ष प्राप्त होता है।
विष्णु धर्म और संरक्षण के देवता हैं, जबकि लक्ष्मी समृद्धि और धन की देवी। उनका संयोजन जीवन में धर्म और अर्थ (धन) का संतुलन दर्शाता है। यही संतुलन गार्हस्थ्य जीवन और समाज के लिये आवश्यक माना गया है।
मुख्य रूप से विष्णु हिन्दू धर्म में पूजित हैं, परंतु नेपाल, बाली (इंडोनेशिया), थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों में भी विष्णु और उनके अवतारों की उपासना होती है। वहाँ के मंदिरों और कला में विष्णु और कृष्ण-राम जैसे अवतारों का विशेष स्थान है।