
जाप कैसे गिनें: माला जपने की सही विधि और नियम
तुलसी या रुद्राक्ष की माला से जाप करने के कठोर नियम होते हैं। सुमेरु को क्यों नहीं लांघते? 108 मनके ही क्यों होते हैं? जानें माला साधना का संपूर्ण विज्ञान।
108 मनके ही क्यों होते हैं?
शास्त्रों में 108 की संख्या को ब्रह्मांड की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। एक दिन में मनुष्य लगभग 21,600 बार सांस लेता है। यदि हम इसका आधा (10,800) दिन के लिए और आधा रात के लिए मानें, तो 108 की संख्या इसी 10,800 से ली गई है (अंत के दो शून्य हटाकर)।
वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। जब हम 27 को 4 से गुणा减 करते हैं, तो योग 108 आता है। अतः 108 बार जाप करने का अर्थ है संपूर्ण ब्रह्मांड की प्रदक्षिणा (परिक्रमा) कर लेना।
एक माला में 108 मनकों के बाद सबसे ऊपर जो एक बड़ा मनका होता है, उसे 'सुमेरु' कहते हैं। यह ब्रह्मांड में परमेश्वर के स्थान का प्रतीक है।
माला घुमाने के सख्त नियम
जाप करते समय माला को हमेशा अनामिका (मध्यमा उंगली/Middle Finger) और अंगूठे के पोर (Tips) से घुमाना चाहिए। तर्जनी (Index Finger/पॉइंटर उंगली) का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि तर्जनी अंहकार (Ego) का प्रतीक है।
सुमेरु का उल्लंघन कभी न करें: जब आप जाप करते हुए सुमेरु (109वें मनके) तक पहुँचें, तो उसे लांघें नहीं (Cross न करें) बल्कि वहीं से माला को पलट लें और उल्टी दिशा में नया चक्र शुरू करें। सुमेरु को लांघना ईश्वर को लांघने के समान माना जाता है।
माला को नाभि (Navel) से नीचे न जाने दें और इसे हमेशा गोमुखी (माला के कपड़े का थैला) में रखकर ही फेरें ताकि बाहरी लोगों की नकारात्मक दृष्टि से जाप की एकत्रित ऊर्जा का नाश न हो।

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