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मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। यह कृषि, प्रकृति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
लोग तिल-गुड़ खाते हैं, पतंग उड़ाते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।
यह पर्व वैदिक काल से सूर्य उपासना और ऋतु परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल में भी इसका महत्व भीष्म पितामह की कथा से मिलता है।
मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं, जो पिता-पुत्र के संबंधों में सुधार का प्रतीक है।