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"चार धाम का तृतीय धाम, कैलाशपति का दिव्य निवास"
मंदिर के कपाट सामान्यतः अप्रैल/मई में अक्षय तृतीया या वैदिक ज्योतिषानुसार खोले जाते हैं और कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर/नवंबर) पर बंद कर दिए जाते हैं। सर्दियों में पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।
हाँ, हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है लेकिन यह मौसम और सीट उपलब्धता पर निर्भर करती है। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों के लिए यह सुविधाजनक है। वैध ID, अग्रिम बुकिंग और स्वास्थ्य की जानकारी देना आवश्यक है।
सर्दियों में भगवान केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाती है। इस अवधि में भक्त वहाँ जाकर नियमित दर्शन और पूजा कर सकते हैं।
ट्रेक लगभग 16 किमी लंबा है। यह मध्यम से कठिन श्रेणी का माना जाता है क्योंकि रास्ता ऊँचाई पर है और ठंडा मौसम रहता है। फिटनेस और तैयारी के साथ यात्रा करें। बुजुर्गों और बच्चों के लिए पोनी या पालकी बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
जुलाई-अगस्त में भारी वर्षा और भूस्खलन की संभावना रहती है। इस समय यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है। सुरक्षित यात्रा के लिए मई-जून और सितंबर-अक्टूबर का समय उपयुक्त है।
गौरीकुंड तक अधिकतर नेटवर्क काम करते हैं। ट्रेक मार्ग और मंदिर क्षेत्र में सीमित कवरेज होता है और मौसम पर निर्भर करता है। BSNL और Jio का नेटवर्क अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।
हाँ, ट्रेक मार्ग पर कई ढाबे और चाय की दुकाने हैं जहाँ हल्का भोजन, पानी और चाय मिल जाती है। फिर भी पीने का पानी और कुछ स्नैक्स अपने साथ रखना उचित है।
मंदिर गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी निषिद्ध है। बाहर के प्रांगण में मंदिर प्रशासन की अनुमति अनुसार फोटो ले सकते हैं।
हाँ, गौरीकुंड और सोनप्रयाग में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ट्रेक मार्ग पर भी आपातकालीन सहायता के लिए चिकित्सा व्यवस्था रहती है। ऑक्सीजन सिलिंडर और स्ट्रेचर सुविधा भी उपलब्ध होती है।
हाँ, उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रा रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। आप इसे ऑनलाइन पोर्टल पर या स्थानीय पंजीकरण केंद्र पर कर सकते हैं। इससे आपातकालीन स्थिति में ट्रैकिंग और सहायता मिलती है।