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"मोक्ष की नगरी, भगवान शिव का पावन धाम"
हर शाम दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती होती है — यह भव्य और अनुशासित समारोह होता है जिसमें पुजारी दीप दिखाकर और भजन-कीर्तन के साथ आरती करते हैं। दर्शक घाट पर या नाव से आरती का आनंद ले सकते हैं; त्यौहारों के समय सीट और नाव की व्यवस्था पहले से बुक कर लें।
घाटों के पास बजट धर्मशालाएँ व छोटे होटल उपलब्ध हैं; बिंदु-बिंदु पर मध्यम एवं उच्च श्रेणी के होटल भी हैं (लक्ष्मीपुर/सारनाथ क्षेत्र)। त्यौहारों में पहले से आरक्षण आवश्यक है।
वाराणसी सामान्यतः तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित है परंतु भीड़भाड़ और संकरी गलियों में सामान्य सावधानी आवश्यक है। महिलाओं के लिए शाम के समय एकल भ्रमण से बचें, प्रतिष्ठित आवास चुनें और स्थानीय परिवहन/कैब सेवाओं का उपयोग करें।
सुबह के समय (सूर्योदय से थोड़ा पहले) और संध्या के समय स्नान पारंपरिक रूप से श्रेष्ठ माना जाता है — इन समयों में घाटों का धार्मिक माहौल अधिक गहरा होता है। भीड़ और मौसम के अनुसार सावधानी बरतें।
दर्शन से पहले हल्का शालीन कपड़ा पहनें और त्वरित सुरक्षा जांच के लिए तैयार रहें। त्यौहारों में लंबी कतारें लग सकती हैं; तेज़-पैकेज और विशेष दर्शन विकल्प (यदि उपलब्ध हों) के बारे में स्थानीय मंदिर प्रबंधन से जानकारी लें।
गंगा आरती देखना, घाटों पर सुबह की सैर, बनारसी साड़ी/तांबे के बर्तन की खरीदारी और स्थानीय बनारसी खान-पान (पान, लस्सी, हलवा) — ये अनुभव शहर की आत्मा से सीधे जुड़े हैं।
सारनाथ (बुद्ध से जुड़ा स्थल) लगभग 10 किमी की दूरी पर है और अवश्य दौरा करना चाहिए; इसके अलावा, अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट और स्थानीय मंदिर जैसे तुलसी घाट आदि का भ्रमण उपयोगी रहता है।
कुछ मंदिरों और विशेष पूजा-क्षेत्रों में सुरक्षा व अनुशासन कारणों से मोबाइल या कैमरा प्रतिबंधित हो सकते हैं—स्थानीय नियमों का पालन करें। यदि अनुमति है तो संयमित और सम्मानजनक उपयोग करें।
अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम ठंडा और सुखद रहता है; हालांकि त्योहारों के कुछ दिनों में भीड़ अधिक होती है। गर्मी और मानसून के दौरान भीड़ कम मिल सकती है पर तापमान/बारिश के हिसाब से तैयारी रखें।
घाटों और मंदिरों के निकट कई पंडित और पुजारी उपलब्ध रहते हैं; प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए मंदिर प्रबंध समितियों या स्थानीय धर्मशालाओं से संपर्क करें और शुल्क/समय पहले से सुनिश्चित कर लें।