
एकादशी व्रत का महत्त्व, नियम और शरीर पर इसका प्रभाव
महीने में दो बार आने वाली एकादशी साधारण उपवास नहीं है। यह मन और शरीर की सफाई का सबसे बड़ा विज्ञान है।
एकादशी क्या है?
हिंदू पंचांग (Calendar) के अनुसार चंद्र मास (Lunar month) के दोनों पक्षों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) की 11वीं तिथि को एकादशी कहते हैं। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, जो जगत के पालनहार हैं।
अध्यात्म के अनुसार हमारी दस इंद्रियाँ (5 ज्ञानेंद्रियाँ और 5 कर्मेंद्रियाँ) और ग्यारहवां हमारा 'मन' है। एकादशी का असली अर्थ है—इन ग्यारहों को सांसारिक विषयों से हटाकर, एक (परमात्मा) की दिशा (दशा) में मोड़ देना।
यह केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि 'उपवास' है। उप-वास का अर्थ है 'ईश्वर के निकट वास करना' (To sit near the Divine)। केवल भूखे रहना और दिन भर क्रोध करना, टीवी देखना या झूठ बोलना व्रत नहीं, सिर्फ भुखमरी है।
चावल (अन्न) खाने की क्यों है मनाही?
पौराणिक कथाओं के अलावा, इसके पीछे बहुत गहरा विज्ञान छिपा है। चावल में जल तत्व (Water element) की मात्रा बहुत अधिक होती है। हमारा शरीर 70% पानी से बना है, और जिस तरह चंद्रमा की 11वीं तिथि (ग्रेविटी) समुद्र में उठने वाले ज्वार (Tides) को प्रभावित करती है, वैसे ही यह शरीर के द्रवों को भी प्रभावित करती है।
एकादशी के दिन अन्न और भारी मात्रा में जल ग्रहण करने से शरीर का जल तत्व अस्थिर हो जाता है, जिससे मन में चंचलता और नकारात्मक विचार बहुत तेजी से बढ़ते हैं।
अन्न पचने में बहुत भारी होता है और शरीर की सारी ऊर्जा उसे पचाने में लग जाती है। अन्न का त्याग करने से शरीर की वह ऊर्जा ध्यान, तप और भगवान के नाम स्मरण में लगाई जा सकती है। इसी कारण फलाहार (Fruits) को उत्तम माना गया है जो जल्दी पचता है।
वैज्ञानिक शोध और 'ऑटोफैगी' (Autophagy)
जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी (Yoshinori Ohsumi) को 2016 में 'ऑटोफैगी' (Autophagy) पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने साबित किया कि जब शरीर को 15-16 घंटे या उससे अधिक समय तक भोजन नहीं मिलता, तो शरीर की कोशिकाएं (Cells) अपने अंदर जमा कचरे, मृत कोशिकाओं और टॉक्सिन्स को खाने लगती हैं।
सनातन धर्म में इसे हजारों सालों से 'एकादशी' और 'लंघनम् परम औषधम्' (उपवास ही सबसे बड़ी दवा है) के रूप में अपनाया गया है। महीने में दो दिन पाचन तंत्र (Digestive system) को पूर्ण विश्राम (Rest) देने से शरीर कैंसर जैसी भयानक बीमारियों की कोशिकाओं तक को नष्ट कर सकता है।
यह मेटाबॉलिज़्म (Metabolism) को दुरुस्त करता है, उम्र बढ़ने (Aging) की प्रक्रिया को धीमा करता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहद तेज़ कर देता है।
एकादशी के नियम और पालन
नियम 1: दशमी (एक दिन पहले) सूर्यास्त के बाद भारी भोजन से बचें। एकादशी के दिन सूर्योदय से व्रत आरंभ होता है और द्वादशी (अगले दिन) सूर्योदय के बाद पारायण (व्रत खोलना) किया जाता है।
नियम 2: इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें, क्रोध न करें, मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन (तामसिक भोजन) का पूर्णतः त्याग करें। 'निंदा' (Backbiting) से बचना सबसे महत्वपूर्ण है।
नियम 3: रात्रि जागरण (जागकर भजन-कीर्तन) का एकादशी में बहुत अधिक महत्व है, लेकिन यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो आप नाम जाप करते हुए सो सकते हैं। पारायण हमेशा तुलसी पत्ता और जल ग्रहण करके ही करना चाहिए।

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