ॐ
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यह शिव और शक्ति के मिलन की महान रात है। आध्यात्मिक साधकों के लिए यह ऊर्जा के उर्ध्वगमन का समय है।
भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और रात भर जागरण करते हैं।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने कालकूट विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी।
मान्यता है कि इसी रात शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।