ॐ
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यह सूर्य देव और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे कठिन और पवित्र व्रत है।
नदी के किनारे अर्ध-विराम में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
मान्यता है कि कर्ण और द्रौपदी दोनों ने सूर्य की उपासना के लिए यह व्रत किया था।
छठी मैया सूर्य देव की मानस बहन मानी जाती हैं, जो संतानों की रक्षा करती हैं।