ॐ
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प्रकृति की पूजा और इंद्र के अहंकार के दमन का पर्व। इसे 'अन्नकूट' भी कहा जाता है।
गोबर के गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी पूजा की जाती है और 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं।
द्वापर युग में कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की जगह प्रकृति (गोवर्धन पर्वत) की पूजा करने को कहा था।
इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए कृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था।