नवरात्रि
महत्ता
माँ दुर्गा के नौ रूपों की शक्ति की उपासना का पर्व। नौ रातों में से प्रत्येक रात्रि देवी के एक अलग स्वरूप को समर्पित होती है, और यह नारी शक्ति और बुराई के विनाश का प्रतीक है।
उत्सव
भक्त नौ दिनों तक पूर्ण या आंशिक व्रत रखते हैं, पूरे पर्व के दौरान निरंतर जलने वाली अखंड ज्योति जलाते हैं, और प्रतिदिन संध्या को देवी की प्रतिमा के चारों ओर गोल घेरे में गरबा-डांडिया रास खेलते हैं। पर्व का समापन कन्या पूजन से होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और भोजन व उपहार दिए जाते हैं।
इतिहास
मार्कंडेय पुराण के अनुसार देवी ने आकार बदलने वाले असुर महिषासुर से नौ दिन और रात तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर संसार को मुक्त किया, जिसे विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में नवरात्रि अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है - बंगाल में दुर्गा पूजा, गुजरात में गरबा-डांडिया और उत्तर भारत में रामलीला के रूप में।
पौराणिक कथा
कथा है कि भगवान राम ने भी रावण से युद्ध से पूर्व नौ दिनों तक माँ दुर्गा की उपासना की और उनकी शक्ति व आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए चंडी होम किया। यही कारण है कि नवरात्रि और दशहरा एक के बाद एक मनाए जाते हैं।
परंपराएं और रीति-रिवाज
- •घटस्थापना
- •कन्या पूजन
- •गरबा
- •अस्त्र पूजा
पूजा विधि
- •दुर्गा सप्तशती पाठ
- •हवन
- •संधि पूजा
विशेष व्यंजन
क्षेत्रीय विविधताएं
- •बंगाल में दुर्गा पूजा
- •गुजरात में गरबा
- •मैसूर में दशहरा वैभव
क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- ✓स्वच्छता बनाए रखें
- ✓कन्याओं को दान दें
क्या न करें
- ✗बाल/नाखून न काटें
- ✗मांसाहार वर्जित

