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"यमुना नदी का उद्गम स्थल, चारधाम का प्रथम धाम"
यमुनोत्री सड़क मार्ग से केवल जानकी चट्टी तक पहुँचा जा सकता है। वहाँ से 5 किमी का ट्रेक करना पड़ता है। यह ट्रेक पैदल, पोनी, पालकी या पिठ्ठू से पूरा किया जा सकता है। बुजुर्ग और छोटे बच्चों के लिए पालकी या पोनी बेहतर विकल्प हैं।
नवंबर से अप्रैल तक यमुनोत्री मंदिर बर्फबारी के कारण बंद रहता है। इस अवधि में यमुना माँ की पूजा शीतकालीन गद्दी स्थल खरसाली गाँव में होती है। यह गाँव जानकी चट्टी के पास स्थित है और यहाँ परंपरागत विधि-विधान से यमुना माँ की आराधना की जाती है।
हाँ, मंदिर के पास सूर्यकुंड नामक प्राकृतिक गरम जल स्रोत है। यहाँ श्रद्धालु कपड़े में चावल या आलू बाँधकर गरम जल में पकाते हैं और फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यह परंपरा यमुनोत्री यात्रा का विशेष आकर्षण है।
यमुनोत्री यात्रा के लिए मई–जून और सितंबर–अक्टूबर सर्वोत्तम समय है। इन महीनों में मौसम सुहावना और सुरक्षित होता है। मानसून (जुलाई–अगस्त) में भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है। नवंबर से अप्रैल तक मंदिर बंद रहता है।
हाँ, लेकिन पैदल ट्रेक बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए कठिन हो सकता है। ऐसे श्रद्धालु पोनी, पालकी या पिठ्ठू का सहारा ले सकते हैं। ऊँचाई और ठंड के कारण उन्हें पर्याप्त तैयारी और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही यात्रा करनी चाहिए।
हाँ, उत्तराखंड सरकार द्वारा चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। यह सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण है। रजिस्ट्रेशन पोर्टल: https://registrationandtouristcare.uk.gov.in
जानकी चट्टी तक अधिकांश मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होते हैं। यमुनोत्री मंदिर क्षेत्र और ट्रेक मार्ग पर नेटवर्क सीमित और मौसम पर निर्भर होता है। BSNL और Jio का कवरेज अपेक्षाकृत बेहतर है।