लोड हो रहा है...
Loading...
Loading...

"गंगा प्रवेश द्वार, हर की पौड़ी की पावन भूमि"
गंगा आरती प्रतिदिन हर की पौड़ी घाट पर प्रातःकाल सूर्योदय के समय (लगभग 5:30–6:30 AM) और सायंकाल सूर्यास्त के समय (लगभग 6:30–7:30 PM) संपन्न होती है। शाम की आरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है जिसमें हजारों भक्त दीप प्रवाहित करते हैं।
मान्यता है कि हरिद्वार में गंगा स्नान करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से कुंभ और मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर यहाँ स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
हर की पौड़ी हरिद्वार का सबसे प्रमुख घाट है। मान्यता है कि यहाँ स्वयं भगवान विष्णु और भगवान शिव ने कदम रखे थे। इसी कारण इसे 'हर की पौड़ी' कहा जाता है।
अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है जब मौसम ठंडा और सुखद होता है। ग्रीष्म और मानसून में भी यात्रा संभव है लेकिन गर्मी और उमस अधिक होती है।
कुंभ मेला हर 12 साल में हरिद्वार में आयोजित होता है जबकि अर्धकुंभ हर 6 साल पर। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष चैत्र और कार्तिक पूर्णिमा पर भी विशेष स्नान मेला लगता है।
हाँ, यहाँ धर्मशालाएँ, आश्रम, बजट होटल से लेकर लक्ज़री होटल तक सभी प्रकार की व्यवस्था उपलब्ध है। भीड़ वाले सीजन (कुंभ, दीपावली, सावन) में अग्रिम बुकिंग करना बेहतर होता है।
हर की पौड़ी के अलावा मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर, माया देवी मंदिर, दक्षेश्वर महादेव मंदिर और पतंजलि योगपीठ प्रमुख स्थल हैं।
हाँ, हरिद्वार एक प्रमुख तीर्थस्थल है और परिवार सहित यात्रा करना सुरक्षित है। भीड़-भाड़ में बच्चों और सामान का ध्यान रखें और नदी में स्नान करते समय सुरक्षा नियमों का पालन करें।
डुबकी लगाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन श्रद्धालु गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यकारी मानते हैं। यदि कोई स्वास्थ्य कारणों से स्नान न कर सके तो केवल जल का स्पर्श करना भी पवित्र माना जाता है।
यदि आप केवल गंगा स्नान और गंगा आरती करना चाहते हैं तो एक-दो दिन पर्याप्त हैं। लेकिन यदि आप मनसा देवी, चंडी देवी, ऋषिकेश और आसपास के स्थल देखना चाहते हैं तो 3–4 दिन का समय उत्तम रहेगा।